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दिल्ली सरकार की प्रशिक्षण योजनाएं निर्माण क्षेत्र के श्रमिकों की स्थिति को प्रभावित करेंगी

सरकारी योजनाओं के तहत सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को संरचित प्रशिक्षण दिया जाएगा।

लेखक Delhi Business Desk · प्रकाशित 25 जुलाई 2026

हमने यह रिपोर्ट कैसे तैयार की

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Daily Network finance briefing tile, illustration, not a photograph
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दिल्ली सरकार सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत तीन वर्षों में 1.20 लाख पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को कुशल बनाने की योजना बना रही है। इसके लिए हर साल 40,000 श्रमिकों को उनके व्यवसाय से संबंधित 120 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

श्रमिक प्रशिक्षण पर सरकार के फैसले

यह योजना व्यापक कार्यबल विकास प्रयासों का हिस्सा है, जिसका सीधा असर इस बात पर पड़ेगा कि निर्माण कंपनियां किस तरह श्रमिकों तक पहुंचती और उन्हें तैयार करती हैं। कार्यक्रम का यह बड़ा पैमाना दर्शाता है कि अधिकारियों ने कौशल की कमी को एकमुश्त उपायों की बजाय वार्षिक लक्ष्यों के जरिए दूर करने का फैसला किया है।

दिल्ली कौशल विकास मिशन की भूमिका

दिल्ली कौशल विकास मिशन ने कौशल उन्नयन को अपनी प्रमुख गतिविधि के रूप में अपनाया है। इसमें जोनापुर गांव में एक विश्वस्तरीय कौशल उन्नयन केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है, जिसे सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन के सहयोग से विकसित किया जाएगा और जो हर साल 25,000 कुशल श्रमिक तैयार करेगा। इन कदमों से स्थानीय कंपनियों के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की भर्ती और उन्हें बनाए रखने की परिस्थितियां बेहतर होंगी।

निर्माण क्षेत्र की कंपनियों के सामने यह चुनौती है कि वे 120 घंटे का प्रशिक्षण पूरा करने वाले श्रमिकों को अपनी चल रही परियोजनाओं में कैसे शामिल करें। तीन साल की समयसीमा और हर साल 40,000 प्रतिभागियों का लक्ष्य श्रम आपूर्ति का एक नियमित और भरोसेमंद माध्यम प्रदान करता है, जिससे अलग-अलग कंपनियों को अपने स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

मौजूदा ढांचे के तहत क्रियान्वयन

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 इस प्रशिक्षण प्रतिबद्धता का कानूनी आधार प्रदान करती है। दिल्ली में काम करने वाली निर्माण कंपनियां जोनापुर केंद्र के चालू होते ही अपनी भर्ती और परियोजना योजना को वहां से मिलने वाले कुशल श्रमिकों के अनुसार व्यवस्थित कर सकती हैं। हर साल 25,000 कुशल श्रमिकों की उपलब्धता उपलब्ध श्रम पूल में एक मापनीय वृद्धि करेगी।

कंपनियों के लिए अगला कदम यह है कि वे रोजगार निदेशालय और दिल्ली कौशल विकास मिशन द्वारा संचालित नामांकन प्रक्रियाओं पर नजर रखें, ताकि अपनी परियोजना जरूरतों के अनुसार आवश्यक प्रशिक्षण घंटे पूरे करने वाले श्रमिकों का मिलान किया जा सके।

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