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राष्ट्रीय संग्रहालय ने 160 ऐतिहासिक वस्तुओं के साथ डेकोरेटिव आर्ट्स-I गैलरी फिर से खोली

नवीनीकृत गैलरी में 18वीं और 19वीं सदी की हाथीदांत, जेड और सिरेमिक कलाकृतियां एक बार फिर दिल्लीवासियों के लिए प्रदर्शित की गई हैं, और यह ऐसे समय में हुआ है जब आसपास के इलाके में व्यावसायिक गैलरियों का एक नया केंद्र उभर रहा है।

लेखक Delhi Culture Desk · प्रकाशित 18 जुलाई 2026

हमने यह रिपोर्ट कैसे तैयार की

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राष्ट्रीय संग्रहालय ने 160 ऐतिहासिक वस्तुओं के साथ डेकोरेटिव आर्ट्स-I गैलरी फिर से खोली
Photo: Guptaele / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय ने अपनी नवीनीकृत डेकोरेटिव आर्ट्स-I गैलरी को फिर से आम जनता के लिए खोल दिया है। इसमें 18वीं और 19वीं सदी के भारत की हाथीदांत, जेड और सिरेमिक से बनी 160 दुर्लभ कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं।

दिल्ली के लिए यह समय क्यों अहम है

मुंबई के विपरीत, दिल्ली में लंबे समय से कोई एक केंद्रित व्यावसायिक कला क्षेत्र नहीं था। लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है। डिफेंस कॉलनी में कई स्थापित गैलरियां एक-दूसरे से पैदल दूरी पर खुल चुकी हैं। ऐसे में राष्ट्रीय संग्रहालय का यह पुनरुद्घाटन इस उभरते कला परिदृश्य को एक सार्वजनिक आधार देता है, जहां स्थानीय निवासी और बाहर से आए पर्यटक आसपास की有 पेड एग्जिबिशन के साथ-साथ इस निःशुल्क या कम खर्चीले विकल्प का भी लाभ उठा सकते हैं।

डिफेंस कॉलनी में पहले से ही वढेरा आर्ट गैलरी और उसकी समकालीन शाखा श्राइन एम्पायर, अकार प्रकार, और हाल ही में आई मिरचंदानी + स्टाइनरूके, मेथड, तथा गैलरीस्के और फोटोइंक के साझा परिसर जैसी गैलरियां मौजूद हैं। ये सभी आधुनिक और समकालीन कला पर केंद्रित हैं, जो राष्ट्रीय संग्रहालय में अब फिर से दिखाई दे रहीं ऐतिहासिक कलाकृतियों की स्वाभाविक पूरक बनती हैं।

क्या देखें और यात्रा की योजना कैसे बनाएं

प्रदर्शित 160 वस्तुओं में नक्काशीदार हाथीदांत, जेड की वस्तुएं और सिरेमिक के नमूने शामिल हैं, जो उस दौर के दरबारी और आम जनजीवन की रुचियों को दर्शाते हैं। संग्रहालय के कर्मचारियों के अनुसार, नवीनीकरण के बाद रोशनी और डिस्प्ले केस बेहतर हुए हैं, जिससे बारीक कारीगरी को करीब से देखना आसान हो गया है। गैलरी के लिए किसी नए प्रवेश शुल्क की घोषणा नहीं की गई है।

आगंतुक राष्ट्रीय संग्रहालय की सैर के साथ डिफेंस कॉलनी की गैलरियों में चल रही प्रदर्शनियां भी देख सकते हैं। किरण नादर म्यूज़ियम ऑफ आर्ट और आने वाला ब्रिज म्यूज़ियम, जिन्हें कई गैलरी संचालक दिल्ली आने की वजह बताते हैं, राजधानी में एक कला-केंद्रित दिन बिताने की संभावनाओं को और मजबूत करते हैं। जाने से पहले खुलने के समय की जांच जरूर करें, क्योंकि इस साल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में निर्माण संबंधी पाबंदियों के चलते कुछ निजी गैलरियों के शेड्यूल प्रभावित हुए हैं।

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