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दिल्ली की हरित तकनीक की दिशा में पहल: संभावनाओं के साथ जोखिम और नैतिक सवाल भी
नेट-ज़ीरो ई-कचरा इको पार्क और विस्तारित इलेक्ट्रिक बस बेड़े जैसी योजनाएं पर्यावरण के लिहाज से फायदेमंद हैं, लेकिन इनसे श्रमिकों के बदलाव, विस्तार की संभावना और सार्वजनिक-निजी मॉडल को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
हमने यह रिपोर्ट कैसे तैयार की

दिल्ली होलंबी कलां में भारत का पहला नेट-ज़ीरो ई-कचरा इको पार्क खोलने की तैयारी में है। 11.4 एकड़ में फैली यह 150 करोड़ रुपये की परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत हर साल 51,000 मीट्रिक टन से अधिक इलेक्ट्रॉनिक कचरे के प्रसंस्करण के लिए तैयार की गई है।
प्रमुख योजनाएं जारी
यह परियोजना व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, जिनमें दिल्ली सौर नीति 2023 भी शामिल है, जिसका लक्ष्य 2027 तक 4,500 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। इसके अलावा तीन आधुनिक डिपो और पांच स्विचिंग सब-स्टेशनों की मदद से 300 नई इलेक्ट्रिक बसें जोड़ी जाएंगी, जिससे ई-बसों का बेड़ा लगभग 1,200 तक पहुंच जाएगा। एक अलग ग्रीन दिल्ली स्टार्टअप चैलेंज के तहत वायु और जल प्रदूषण के समाधान विकसित करने वाले आठ स्टार्टअप्स को ₹2 करोड़ आवंटित किए जाएंगे, साथ ही आईआईटी दिल्ली की ओर से इनक्यूबेशन सहायता भी मिलेगी।
जोखिम और नैतिक सवाल
इन कदमों से 1,000 से अधिक हरित रोजगार तो पैदा होंगे और खतरनाक ई-कचरे की हैंडलिंग में लगे असंगठित मजदूरों को औपचारिक दायरे में लाने की कोशिश भी होगी, लेकिन इस बदलाव से प्रशिक्षण, सुरक्षा मानकों और नई भूमिकाओं तक समान पहुंच को लेकर व्यावहारिक सवाल खड़े होते हैं। सार्वजनिक-निजी भागीदारी के ढांचे में दीर्घकालिक जवाबदेही और लागत वितरण जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है, खासकर जब आवासीय और व्यावसायिक इमारतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम की संख्या लगभग 10,700 तक पहुंच चुकी है।
मौजूदा स्तर पर प्रमाण
गतिविधि के सत्यापित आंकड़े बताते हैं कि लगभग 1,200 ई-बसें पहले से ही चालू हैं और 2027 के लिए सौर ऊर्जा का लक्ष्य तय किया जा चुका है, जो दर्शाता है कि यह प्रयास पायलट चरण से आगे बढ़ चुके हैं। आधिकारिक घोषणाओं पर आधारित ये आंकड़े एक ठोस आधार प्रदान करते हैं, जिसके जरिए बिना किसी अप्रमाणित अनुमान के रोजगार के औपचारिकीकरण और कचरा प्रसंस्करण की मात्रा पर भविष्य के प्रदर्शन को परखा जा सकेगा।
आगे की प्राथमिकता यह देखना होगी कि होलंबी कलां सुविधा में मौजूदा मजदूरों को किस तरह शामिल किया जाता है और क्या स्टार्टअप फंडिंग से प्रदूषण में मापनीय कमी आती है। निवासी और कारोबारी दिल्ली सरकार के पोर्टल पर जाकर स्रोत दस्तावेजों में दिए गए लिंक के माध्यम से कार्यान्वयन की जानकारी हासिल कर सकते हैं।