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दिल्ली के निवासी बेहतर नींद के लिए अपना रहे हैं नियमित दिनचर्या
शहर भर के लोग डॉक्टरों की सलाह पर अमल करते हुए रात की नींद को बेहतर बनाने की कोशिश में जुटे हैं।
हमने यह रिपोर्ट कैसे तैयार की
दिल्ली के नींद विशेषज्ञों का सुझाव है कि नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए सोने से कम से कम 1 घंटे पहले सभी स्क्रीन बंद कर दें। शहर के निवासियों का कहना है कि वे इस आदत को अपनी शाम की दिनचर्या में शामिल कर रहे हैं, जिससे बिना किसी डिजिटल उत्तेजना के नींद के लिए तैयार होने में मदद मिलती है।
नींद की आदतों पर यह मार्गदर्शन इसलिए अहम है क्योंकि यह उन सामान्य कारणों को दूर करता है जो नींद में बाधा डालते हैं। नियमित दिनचर्या बनाए रखने से शरीर अपनी प्राकृतिक लय के अनुसार चलता है, जिससे दिनभर ऊर्जा का स्तर बना रहता है।
दिल्ली के निवासी बताते हैं कि वे पूरे सप्ताह सोने और जागने का समय एक जैसा रखकर इन आदतों को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल कर रहे हैं। इस तरीके में छुट्टी के दिन भी शामिल हैं, ताकि शरीर की आंतरिक घड़ी स्थिर रहे और नींद आने में देरी न हो।
सोने के लिए माहौल को अनुकूल बनाना
एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू है कमरे का माहौल। कमरे का तापमान लगभग 65-68°F यानी 24°C से नीचे रखना, ब्लैकआउट पर्दों से रोशनी रोकना और ईयरप्लग या व्हाइट नॉइज़ की मदद से शांत वातावरण बनाना, गहरी नींद में सहायक होता है। स्थानीय लोगों का अनुभव है कि इन बदलावों से रात में नींद टूटने की समस्या काफी कम हो जाती है।
खान-पान और गतिविधियों का सही समय
समय का भी अहम रोल है। सोने से 3-4 घंटे पहले कैफीन, 2-3 घंटे पहले शराब और भारी भोजन तथा 2-3 घंटे पहले कठोर व्यायाम से परहेज करने से नींद में खलल नहीं पड़ता। निवासियों का कहना है कि वे इन चीज़ों का समय दिन में पहले रखते हैं ताकि शरीर को सोने से पहले शांत होने का पर्याप्त मौका मिले।
नींद न आने पर क्या करें
अगर 20 मिनट के भीतर नींद न आए तो विशेषज्ञ शांत विकल्प अपनाने की सलाह देते हैं। किताब पढ़ना, गर्म पानी से नहाना या ध्यान लगाना जैसी गतिविधियाँ मन को धीरे-धीरे नींद की ओर ले जाती हैं। दिल्ली के लोग बताते हैं कि बेचैन रातों में यही तरीका दोहराने से एक भरोसेमंद आदत बन जाती है और निराशा से भी बचाव होता है।
ये सुझाव सीधे नींद विशेषज्ञों से लिए गए हैं और किसी डॉक्टर की सलाह से इन्हें अपनी ज़रूरत के अनुसार अपनाया जा सकता है। समय के साथ इन तरीकों को मिलाकर अपनाने से एक ऐसी नियमित प्रक्रिया बनती है, जिससे बिना किसी बड़े बदलाव के बेहतर और स्थिर नींद मिलती है।
यह तरीका इसलिए व्यावहारिक है क्योंकि इसमें छोटे और नियमित बदलावों पर ज़ोर दिया जाता है जो मौजूदा दिनचर्या में आसानी से फिट हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि एक बार स्क्रीन बंद करने और कमरे का तापमान नियंत्रित करने जैसी बुनियादी आदतें पक्की हो जाएं, तो बाकी बदलाव भी अपने आप होते चले जाते हैं और सुबह उठने पर तरोताज़ा महसूस होता है।